स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातें

I think therefore I am …… I think !!! Cut the crap, I am here to write so that I get loads of traffic and I feel important ……

ज़िन्दगी पर दो

——पहली——

(जोगिन्दर साहब, आप से आज हुई बातों से प्रेरित । आपके आगरे के घर की दीवारों पर उभर आई पपड़ीयों को समर्पित)

दबे पैर निकली जा रही हो,
तुम तेज़ रफ़्तार से चलकर
मेरे कदमों के नीचे से
चुपचाप – ज़िन्दगी ।

ज़रा रुको तो, दम तो लो,
अभी बचपन भी नहीं जीया,
कहानीयां सब सुनी नहीं,
नहीं खेला खेल जी भरकर अभी ।

सपने देखे भी नहीं रंगीं,
मन भर नहीं हुई होली-दिवाली,
पिता के कंधों पर बैठ दशहरे पर
अभी देखने हैं जलते रावण कई ।

तुम तो चली जा रही हो,
मुड़ कर भी क्या देखोगी नहीं?
मुझे पसन्द थे वो दिन,
मगर वो तो तुम लौटाओगी नहीं !

यौवन भी बीता जाएगा,
तेरा चक्र चलता जाएगा,
पता नहीं कहाँ पहुँचूंगा मैं,
जाने तू कहाँ ले जाएगी ।

अधेड़ से बूढ़ा फिर एक याद,
फिर तो राख भी खो जाएगी,
क्या उसके बाद भी है कोई सफ़र
वक्त की धार ही बताएगी ।

——–छोटी सी दूसरी——-

मैं क्या करूँ, तेरा क्या करूँ,
तेरे साथ मैं ऐसा क्या करूँ
कि जब तू न रहे तो भी यह रहे
मैनें तेरे साथ, ज़िन्दगी, इन्साफ़ किया ।

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प्यास और आस

बहुत पहले लिखी थी यह कविता और साथ में यह भी लिखा था कि काश यह कविता अधूरी ही रहे हमेशा । एक अन्जान सा डर समा गया है दिल में, कहीं मेरा यह सपना भी अधूरा न रह जाए ।

मन रे, ये जो है तेरे भीतर की प्यास,
वैशाख में ज्यों हो श्रावण की तुझको आस ।

ज्यों कृष्ण पक्ष में पूर्ण चन्द्र को तरसे तू,
ज्यों नमी हवा में ढूंढे जब चलती हो लू ।

सूख चुकी छाती में जैसे ढूंढता पय शिशु,
सूने घर के द्वार खड़ा हो जैसे आस लगाए भिक्षु ।

ज्यों दुर्वासा से क्षमा की आस रखे अम्बरीष,
हथेली पर अपनी ज्यों थामना चाहे कोई गिरीश ।

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Stranger

The Heart of your soul is what I want to discover,
Things which give you joy, I want to uncover.

Want to know what gives you a smile and a bother,
want to know you stranger

want to know you, and you I want to hear,
long it may take, but not always will you be a stranger.

Hey stranger, I know you will come here and this is for you. I have edited this a bit from the original.

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Shattered Dreams

Dreams,
Shattered dreams.
Dreams of dreaming together,
of making a life together

Shattered dreams
of a happy life,
of being a father.

And all dreams shattered
when you closed your eyes,
never to open ever.

I miss you Jaan …..

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बडे़ दिन हुए

बडे़ दिन हुए
रोया नहीं खुल के
दिल बहुत रोया
किसी से कुछ
कहा नहीं खुल के

किस से कहूं
और क्या
समझ में न आया
रहता हूं कतराया
बडे दिन हुए

कई बार मुस्कुराया भी हूं
बस नकली मुस्कान
झूठ मूठ ही मरे चेहरे पर
लाया हूं जान
बडे़ दिन हुए

अब रो लेना चाहता हूं
पर किस कंधे पर
रोऊं सर रख कर
वो चला गया है दूर
बडे़ दिन हुए

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Laughter – मेरे यार की हंसी !

Laughter

यार तुम्हारे साथ, जीवन है आनन्द भरा,
धरती और अम्बर में फैला, रंग जैसे हरा ।
कोई छोटा-बड़ा नहीं, न कुछ तेरा-मेरा,
जीवन का सहारा मेरा, ये कंधा तेरा ।।

कई आऎंगे, और चले जाऎंगे भी कई,
कुछ देर खड़े रह कर संग मुस्काऎंगे कई।
पर तू रहेगा सदा, और संग मुस्काऎगा सदा,
और तब भी जब सब चले जाऎंगे, देंगे धता ।।

याद रख़ना सदा, साथ है लंबा तेरा और मेरा,
और चाहीयेगा कंधा, मुझे तेरा या तुझे मेरा।
कौन सो जाए सदा की नींद, तू पहले या मैं पहले,
तब तक आ ऐ दोस्त हम हंस लें, खूब जी लें ॥

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तुम बिन

जीवन,
क्षणभंगुर।
स्मृतियां,
अमर।

तुम संग,
जीवन।
तुम बिन
जीवन बदरंग।

जीवन
सर्प दंश सा।
एक चीत्कार
मौन सा।

एक घुटी हुई
सांस सा,
टूटी हुई,
कई आस सा।

अंधे हुए
एक चक्षु सा,
लुटे हुए
एक भिक्षु सा।

जीवन
एक मौत सा
साक्षी
तेरी मौत का।

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तुम चले गये

तुम चले गए
तो चली गई रौशनी
अब सामने क्या खडा़
दिख़ता नहीं|

और चली गई
धूप से गर्मी,
ओस से नमी गई,
शरीर से नहीं प्राण|

समझ भी
और सोच भी रुक गई,
बार बार बस
तेरे चेहरे तक जा कर|

और तेरा चेहरा भी तो
एक याद बना रह गया,
तेरी मुस्कान
समय में चिपका एक लम्हा बना रह गया|

मैं हूं खड़ा
उस रास्ते पर,
जहां से हम गुज़रे थे
जहां कभी थी रौशनी|

कभी सोचा न था
ऐसी एक कविता भी लिखूंगा मैं
तुम चले जाओगे
तुम्हारी तस्वीर पर सर रख़ कर रोऊंगा मैं|

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स्याह इन्द्रधनुष – चांदनी रात

प्रियवर, इस ब्लॉग का प्रयोग मैं अपने आप को अभिव्यक्त करने के लिये करता हूं और आप का स्वागत है मेरे अन्दर झांक कर देख लेने के लिये ।
आम तौर पर मैं कविता के माध्यम से अपने आपको व्यक्त करता हूं, मैं हिंदी का पंडित नहीं हूं, त्रूटि हो जाने पर कृपया उसे मेरे ध्यान में लायें एवं मुझे क्षमा करें ।

Kerala - God's Own Country

Death – By Grey Rainbow

There is so much that we think we will be able to do in this life,
there is so much we want to believe we will accomplish.
And then comes death, suddenly, it comes to the person closest to your heart.
There is nothing after that, no dreams, no desires, there is nothing to be accomplished. One thing remains :
TIME - and you don't know how to kill it.

GOD

इस घट अन्तर बाग बगीचे,
इसी में सिरजनहारा|
इस घट अन्तर पारस मोती,
इसी में नौ लख तारा|
इस घट अन्तर सात समन्दर,
इसी में उठत फ़ौव्वारा|
इस घट अन्तर अनहत गूंजे,
इसी में सांई हमारा|

Kabir - God lives within, not without

कारवां गुज़र गया

हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ,
होठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ,
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ,
और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ,
हो सका न कुछ मगर,
शाम बन गई सहर,
वह उठी लहर कि दह गये किले बिखरबिखर,
और हम डरेडरे,
नीर नयन में भरे,
ओढ़कर कफ़न, पड़े मज़ार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!

(c) - श्री गोपाल दास नीरज ।

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