स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातें

I think therefore I am …… I think !!! Cut the crap, I am here to write so that I get loads of traffic and I feel important ……

कल तस्वीर में मैं रहूँ, न रहूँ ।

Shaam

मेरी पीठ पीछे, शाम तुम ढली जाती हो,
मैं जानता हूँ कि तुम चली जाती हो,
फ़िसलते-लुढ़कते इस सूरज के साथ,
सामने से घिरी आ रही है रात ।

मगर रात भी तो मेहमान है
बस रात भर की ही, चली जाएगी,
जैसे जीवन में आते-जाते हैं सुख-दु:ख,
जन्म मृत्यु, यौवन-बुढ़ापा, श्वास-नि:श्वास ।

सुहानी शाम तुम रात में अंगडा़ईयाँ ले कर
कल सुबह की गोद में दम तोड़ दोगी,
कल शाम मैं किसी और शाम के साए में,
यूँ तस्वीर खिंचाता नज़र आऊंगा ।

या जाने, कल तस्वीर में मैं रहूँ, न रहूँ ।

Advertisements

Filed under: दर्शन, , , , , ,

ज़िन्दगी पर दो

——पहली——

(जोगिन्दर साहब, आप से आज हुई बातों से प्रेरित । आपके आगरे के घर की दीवारों पर उभर आई पपड़ीयों को समर्पित)

दबे पैर निकली जा रही हो,
तुम तेज़ रफ़्तार से चलकर
मेरे कदमों के नीचे से
चुपचाप – ज़िन्दगी ।

ज़रा रुको तो, दम तो लो,
अभी बचपन भी नहीं जीया,
कहानीयां सब सुनी नहीं,
नहीं खेला खेल जी भरकर अभी ।

सपने देखे भी नहीं रंगीं,
मन भर नहीं हुई होली-दिवाली,
पिता के कंधों पर बैठ दशहरे पर
अभी देखने हैं जलते रावण कई ।

तुम तो चली जा रही हो,
मुड़ कर भी क्या देखोगी नहीं?
मुझे पसन्द थे वो दिन,
मगर वो तो तुम लौटाओगी नहीं !

यौवन भी बीता जाएगा,
तेरा चक्र चलता जाएगा,
पता नहीं कहाँ पहुँचूंगा मैं,
जाने तू कहाँ ले जाएगी ।

अधेड़ से बूढ़ा फिर एक याद,
फिर तो राख भी खो जाएगी,
क्या उसके बाद भी है कोई सफ़र
वक्त की धार ही बताएगी ।

——–छोटी सी दूसरी——-

मैं क्या करूँ, तेरा क्या करूँ,
तेरे साथ मैं ऐसा क्या करूँ
कि जब तू न रहे तो भी यह रहे
मैनें तेरे साथ, ज़िन्दगी, इन्साफ़ किया ।

Filed under: कविता, Hindi Poetry, Kavita, , , , ,

फिर जी लूँ एक बार

चल पड़े हम अपने रास्ते, मैं इधर, तुम उस ओर,
ज़िन्दगी किसी मोड़ पर तुम मुड़ गईं कहीं और ।

कभी बादलों से जब धूप की कोई किरण झांकती है,
किसी मोड़ पर तुम्हारे फिर मिल जाने की एक आस जागती है ।

एक किरण के दिख जाने से दूर नहीं होगा अन्धकार,
फिर इन्द्रधनुष बन जाने का सपना क्यों कर होगा साकार ।

अपने पैर घसीटते हुए कब तक चल पाऊंगा लगातार,
फट न पड़ें छाले, कहीं बैठ न जाऊं हो कर लाचार ।

मुझे बचा लेना ज़िन्दगी मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर,
मौत से पहले तुम्हें जी लेना चाहता हूँ एक बार ।

the picture above in this post is licensed under the Creative Commons Attribution ShareAlike license versions 2.5, 2.0, and 1.0
For the source of the image click here

Filed under: कविता, Hindi Poetry, Kavita, Poetry, , , , , , ,

मौत जब तू आना

मौत जब तू आना
तो साथ ले कर आना
वो सपना
कि तेरे साथ साथ
वो भी फिर आऐगा

वो जो चला गया है
तेरे साथ
उस जहां मे जहां
तू वादा कर
तू मुझे भी ले जाऎगी

तू वादा कर
क्योंकी तेरा वादा
मैनें सुना है
मौत का वादा पूरा होता है
हर हाल में

और बदले में
तेरे वादे के
मैं भी ये वादा करता हूं
कि तुझ पर एक दिन जानेमन
मैं मर मिटूंगा

Filed under: Hindi Poetry, Kavita, , , , , ,

गुनाह

गुनाहे कहना हाले दिल आज क्यों कर बैठे,
अपने दिल की आवाज़ों को क्यों बाहर निकलने दे बैठे।

सुनना ही सबको अपनी किस्मत को है हासिल,
आज दिल की बात सुनकर गै़र हुआ जो था शामिल।

बोल ही सबब हैं परेशानीयों का “स्याह” शायद सारी,
आज समझ में आया खु़दा को ख़ामोश इबादत है क्यों प्यारी।

Filed under: Hindi Poetry, Kavita, Urdu Poetry, , , ,

तुम बिन

जीवन,
क्षणभंगुर।
स्मृतियां,
अमर।

तुम संग,
जीवन।
तुम बिन
जीवन बदरंग।

जीवन
सर्प दंश सा।
एक चीत्कार
मौन सा।

एक घुटी हुई
सांस सा,
टूटी हुई,
कई आस सा।

अंधे हुए
एक चक्षु सा,
लुटे हुए
एक भिक्षु सा।

जीवन
एक मौत सा
साक्षी
तेरी मौत का।

Filed under: Hindi Poetry, Kavita, , , , , ,

तुम चले गये

तुम चले गए
तो चली गई रौशनी
अब सामने क्या खडा़
दिख़ता नहीं|

और चली गई
धूप से गर्मी,
ओस से नमी गई,
शरीर से नहीं प्राण|

समझ भी
और सोच भी रुक गई,
बार बार बस
तेरे चेहरे तक जा कर|

और तेरा चेहरा भी तो
एक याद बना रह गया,
तेरी मुस्कान
समय में चिपका एक लम्हा बना रह गया|

मैं हूं खड़ा
उस रास्ते पर,
जहां से हम गुज़रे थे
जहां कभी थी रौशनी|

कभी सोचा न था
ऐसी एक कविता भी लिखूंगा मैं
तुम चले जाओगे
तुम्हारी तस्वीर पर सर रख़ कर रोऊंगा मैं|

Filed under: Hindi Poetry, Kavita, , , , , ,

स्याह इन्द्रधनुष – चांदनी रात

प्रियवर, इस ब्लॉग का प्रयोग मैं अपने आप को अभिव्यक्त करने के लिये करता हूं और आप का स्वागत है मेरे अन्दर झांक कर देख लेने के लिये ।
आम तौर पर मैं कविता के माध्यम से अपने आपको व्यक्त करता हूं, मैं हिंदी का पंडित नहीं हूं, त्रूटि हो जाने पर कृपया उसे मेरे ध्यान में लायें एवं मुझे क्षमा करें ।

Kerala - God's Own Country

Death – By Grey Rainbow

There is so much that we think we will be able to do in this life,
there is so much we want to believe we will accomplish.
And then comes death, suddenly, it comes to the person closest to your heart.
There is nothing after that, no dreams, no desires, there is nothing to be accomplished. One thing remains :
TIME - and you don't know how to kill it.

GOD

इस घट अन्तर बाग बगीचे,
इसी में सिरजनहारा|
इस घट अन्तर पारस मोती,
इसी में नौ लख तारा|
इस घट अन्तर सात समन्दर,
इसी में उठत फ़ौव्वारा|
इस घट अन्तर अनहत गूंजे,
इसी में सांई हमारा|

Kabir - God lives within, not without

कारवां गुज़र गया

हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ,
होठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ,
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ,
और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ,
हो सका न कुछ मगर,
शाम बन गई सहर,
वह उठी लहर कि दह गये किले बिखरबिखर,
और हम डरेडरे,
नीर नयन में भरे,
ओढ़कर कफ़न, पड़े मज़ार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!

(c) - श्री गोपाल दास नीरज ।

Blog Stats

  • 38,325 hits

Add This

Bookmark and Share

Me On Twitter

  • @sardesairajdeep How do we not make this mistake then?स्याह - रंगीन 2 weeks ago
  • @BDUTT One who cares about something else more than she cares about the nature of her co-passenger's crime! What's… twitter.com/i/web/status/9…स्याह - रंगीन 1 month ago
  • RT @VijayTiwari9: 20 Cr मुसलमानों ने #TripleTalaq पर शांति के साथ फैसला सुन लिया और वहाँ एक बाबा कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है #R…स्याह - रंगीन 1 month ago
  • “Desperation will force your creativity to emerge” by @ChadGrills medium.com/the-mission/yo…स्याह - रंगीन 1 month ago
  • RT @Pontifex: When we are feeling sad, when it feels like everything is going wrong, we should remember: “God loves me. God never abandons…स्याह - रंगीन 1 month ago