स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातें

I think therefore I am …… I think !!! Cut the crap, I am here to write so that I get loads of traffic and I feel important ……

एक प्रयास फिर से !

चाहता तो हूँ की तोड़ सब बंधन, उठ जाऊं, खड़ा हो जाऊं,
सांस लूं पूरे फेफड़े फैला कर, पर, जकड़न बहुत है – सोच भी बंधी सी है |
निस्सिम शक्ति है भीतर, सुना है, सुनते आये हैं,
और कभी कभी लगता भी है की सच सुना है – महसूस किया है,
पर जैसे अफीम खाई है, अकर्मण्यता का प्रण लिया है|

लक्ष्मी की विफल आराधन में रत सरस्वती पुत्र ने
आज तुम्हारे कहने पर प्राण, फिर कलम चलायी है,
देख कर बताओ ज़रा, माँ शारदा भी खिन्न तो नहीं कहीं ?

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एक अच्छी लघु कथा

एसे ही इन्टर्नेट पर घूमते घूमते एक अच्छी सी लघु कथा पढ़ने को मिलि, आप का ध्यान भी आकर्षित करना चाहूंगा :

(This is meant for you even if you have been redirected here from my tweet)
पश्चाताप

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-माँ-पा

कल अपने ब्लॉग पर लिखि कविता का लिंक भेजा था आपको, आपने जवाब में ये भेजा :

प्यारे बेटे,
हमने देखा, हमने सुना, हमने पढा …….
समझें कैसे अपने बेटे को ! ! !

-माँ-पा

———————————————-
मैं आपको बता देना चाहता हूं कि आप ने मुझे वो सब कुछ दिया जो आप दे सकते थे और जो मुझे चाहिये था । मेरे जीवन कि एक उपलब्धि यह है कि मैं आपके साथ रहता हूं, यह उपलब्धि इसलिये है क्योंकि लाखों बेटे इस दुनिया में एसे हैं जो अपने माता पिता के साथ किसी कारण से या किसी बहाने से नहीं रह पाते ।
और अगर आप यह जानना चाहते हैं कि मुझे आप से और क्या चाहिये तो मेरा आपको जवाब यह है कि आपका मुझे “प्यारे बेटे” कह देना मेरे लिये अनंत को पा जाने के बराबर है ।
भीगी आंखों से मैं आपको यह संदेश एसी जगह पर दे रहा हूं जहां इसे कई लोग पढ़ेंगे, सो पढें वो भी और आप भी कि आप से अधिक मुझे और कुछ नहीं चाहिये ।

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मैं न सुन पाया

किस दुःश्चिन्ता में हृदय तुम्हारा
रेखाऎं कई तुम्हारे मुख पर उकेरता,
तुम कहतीं नहीं कुछ मुझसे
पर मैं रेखाऎं पढ़ सकता हूँ ।

पीड़ बैठी, नीढ़ बना हृदय में
मुस्कान से लीपती तुम उसे,
तुम आँखें बन्द रखा करो,
मैं खिड़कीयों से झाँक लेता हूँ ।

मेरे प्रेम से लिखे शब्दों को पढ़ कर,
जब तुम्हारे नयनों से बहा था नीर,
क्यों मैं यह नही कह पाया कि मैं
अश्रुओं का कहा सुन लेता हूँ ।

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Nothing Remains !

Nothing remains ! Everything changes; fragrances fade away, the Sun sets, and the day falls into night.

Everyone has a free will and not even God interferes there. Saints of all ages have preached; love liberates, it does not bind. God liberates, so why should I not ?

May their be peace in all hearts !

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एक बार फिर यूँ

हर ओर तू ही तू है,
हर चीज़ तेरी परछाई,
मैनें जहाँ जहाँ भी देखा,
बस तू ही तू नज़र आई ।

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फ़िर यूँ ही

———-१———-
उसने मुझे “आप” कहना छोड़ दिया,
लगता है मेरी यारी परवान चढी़ ।

या रंगमंच के कारिंदे ने,
फिर कोई डोर खींची और छोडी़ ।

——–२———-

अगर सुनो तो खामोशी में भी आवाज़ होती है,
नहीं तो चीखें भी तो खामोश होती हैं ।

———३————-

जब हम समझे हमें भूल गए वो
उनका हमें पैगाम आया |

जो रुक गयी थीं, वो सांसें चलीं,
जी में हमारे जी आया ।

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दहलीज़

किसी ने लिख भेजी यह, एक छोटे से एस एम एस में, पता नहीं किसने लिखी है पर अच्छी लगी और कहीं भूल न जाऊं इसलिये :

फिर हमें क्यों तेरी देहलीज़ याद आ गयी,
जब लाखों खयाल सीढी़यां चढ़ते उतरते हैं ।

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What my heart says

I miss you jaan. I miss the soft touch of your hands, I miss the touch of your hair which used to flow down my shoulders when you, softly, standing near me put your head on my shoulder. The sparkle of your teeth which added a glitter to my life is missing. I miss your whys, why nots, and your no no nos.

$%^@&*&*& ……. life is miserable.

And then they are showing this ad from an insurance company, the girl is a young child, the father wipes off her tears as she has lost in some game and is crying. In the next shot she grows up to become a pilot, the father has tears in his eyes seeing the girl grow up and realize her dream…….and the girl wipes off those tears in her father’s eyes as he did in the previous shot…… who will wipe my tears off….you went away baby, who will give me my daughter. O my reason to be I now have no reason to be.

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Khushi

Saw this blog, I don’t remember how I came across it, but oh my God am I not impressed and rejuvenated. This blog is by Khushi Arora , and I am so impressed by her that not only am I writing here (infact a copy and paste) what she wrote about herself in her blog, but am also giving her blog a space in my blogroll. So this is what Khushi (literally – Happiness) says she is

  • I am a crazy, poet at heart person with a go-getter attitude.
  • I like the company of people who inspire me, amuse me or just make me laugh my heart out loud.
  • To be my friend, you need to have optimism in your blood and live life a day at a time.
  • I love traveling and the “unknown” intrigues me.
  • With adrenaline gushing through my veins at all times, the word ”impossible” goes deaf on my ears.
  • For me life is full of limitless opportunities and whatever happens, happens for a reason which is to bring the best out in me.

So if you feel that life is harsh, monotonous and limited, then you and me belong to two opposite worlds. Forget me and move on. Syonara Amigo.

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स्याह इन्द्रधनुष – चांदनी रात

प्रियवर, इस ब्लॉग का प्रयोग मैं अपने आप को अभिव्यक्त करने के लिये करता हूं और आप का स्वागत है मेरे अन्दर झांक कर देख लेने के लिये ।
आम तौर पर मैं कविता के माध्यम से अपने आपको व्यक्त करता हूं, मैं हिंदी का पंडित नहीं हूं, त्रूटि हो जाने पर कृपया उसे मेरे ध्यान में लायें एवं मुझे क्षमा करें ।

Kerala - God's Own Country

Death – By Grey Rainbow

There is so much that we think we will be able to do in this life,
there is so much we want to believe we will accomplish.
And then comes death, suddenly, it comes to the person closest to your heart.
There is nothing after that, no dreams, no desires, there is nothing to be accomplished. One thing remains :
TIME - and you don't know how to kill it.

GOD

इस घट अन्तर बाग बगीचे,
इसी में सिरजनहारा|
इस घट अन्तर पारस मोती,
इसी में नौ लख तारा|
इस घट अन्तर सात समन्दर,
इसी में उठत फ़ौव्वारा|
इस घट अन्तर अनहत गूंजे,
इसी में सांई हमारा|

Kabir - God lives within, not without

कारवां गुज़र गया

हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ,
होठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ,
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ,
और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ,
हो सका न कुछ मगर,
शाम बन गई सहर,
वह उठी लहर कि दह गये किले बिखरबिखर,
और हम डरेडरे,
नीर नयन में भरे,
ओढ़कर कफ़न, पड़े मज़ार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!

(c) - श्री गोपाल दास नीरज ।

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