तुम भूले हो अंधियारे में राह किनारे की,
और घने बादलों में ध्रुव तारा भी छुपा हुआ,
बहते जाना धारा के संग लगता तो आसां है,
पर थामो पतवार नाविक दूर किनारा है |
दिल डूबा जाता है और याद प्रिय की आती है,
ठन्डे थपेड़ों में भीग तन-मन कांप जाता है,
मचलती हैं मछलियाँ जल में, बाजुओं में भी,
खेते जाओ नाविक अभी दूर किनारा है |
ले रौशनी खड़े हो कर चट्टान पर किनारे की,
तेरी बाट जोहते होंगे जो रखते होंगे सारोकार
लहरों के उठने बैठने पर आस टूटती-बंधती होगी,
तुझे रखनी है आस नाविक दूर किनारा है |
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