Burning Ganga

21 09 2008

गंगा तुम क्यों जलती हो,
क्या उन पापों से जो धोए तुमने ?
या देख कर उन पापों को
जो होने को तैयार दिलों में ?


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2 responses

21 09 2008
समीर लाल ’उड़न तश्तरी वाले’

छोटी किन्तु गहरी रचना.

22 09 2008
razia786

गंगा तुम क्यों जलती हो,
क्या उन पापों से जो धोए तुमने ?
या देख कर उन पापों को
जो होने को तैयार दिलों में ?

सुंदर रचना।

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