April 6, 2008...6:55 pm
कुछ यूँ ही
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———१———–
क्या नाम दिया तुमने मुझको,
सारी बस्ती में कर दिया बदनाम मुझको ।
जो दिया ही है तो रखेंगे सम्भालकर इसको,
बहुत दिन हुए, किसी ने कुछ दिया नहीं ईनाम मुझको ।
——–२———–
किसी ने कहा -
नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा,
मेरी आवाज़ ही पहचान है, ग़र याद रहे ।
तो किसी ने कहा -
तुम्हारी आवाज़ भी तो ना सुन पाए मन भर के,
तुम्हारे लिखे खत ज़रूर याद रहेंगे ।
नाम गुमे दुनिया से या बदल जाए चेहरा,
तुम्हारा अक्स अपने ज़हन में रखेंगे सम्भाल के ।
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2 Comments
April 7, 2008 at 9:11 am
wah bahut khub
April 7, 2008 at 4:46 pm
Kya baat hai
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