दहलीज़

3 03 2008

किसी ने लिख भेजी यह, एक छोटे से एस एम एस में, पता नहीं किसने लिखी है पर अच्छी लगी और कहीं भूल न जाऊं इसलिये :

फिर हमें क्यों तेरी देहलीज़ याद आ गयी,
जब लाखों खयाल सीढी़यां चढ़ते उतरते हैं ।


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One response

4 03 2008
mehek

nice one

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