यह उन दिनों लिखी थी जब हम मिले ही थे । मैं उसे एस एम एस भेजता था पर वह सो जाया करती थी, पगली ! यह एस एम एस ही मेरे प्रेम पत्र हुआ करते थे, मेरी पातियां हुआ करते थे प्यार भरे। अपनी यादों को ताज़ा करने के लिये मैं यह कविता यहां लिख रहा हूं, यह कविता मैने एक रात उसके सो जाने के बाद उसे लिख भेजी थी, तब मैं उसकी इस सो जाने की आदत से बहुत निराश हो गया था यहां तक कि यह भी सोच बैठा था कि उसे मुझसे प्रेम नहीं। मैं नहीं जानता था तब कि इतनी जल्दी वह हमेशा के लिये सो जाएगी, खै़र —
क्या निद्रा देवी का करती हो आराधन,
या मुझमें रत करती अपना मन।
क्या सो चुकी देखती हो सपने,
या याद में मेरी लगी हो तपने।
हां लगता है सो चुकी हो
मैं लिखूंगा पाति भूल चुकी हो।
चलो मगर कोई बात नहीं है,
प्रिये, जीवन की यह अन्तिम रात नहीं है।
फिर आएगी कल रात नई,
साथ अपने ले ख्वाब कई।
फिर लिखूंगा कल बात नई,
खोलूंगा दिल के राज़ कई।
एक इन्तज़ा है मेरी लेकिन,
तुम सो न जाना प्रिये लेकिन।
तुम सो न जाना प्रिये लेकिन,
तुम सो न जाना प्रिये लेकिन।
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kitna gehra pyar chalakta hai is kavita main.khunsurat bhavana.
धन्यवाद