बडे़ दिन हुए

25 12 2007

बडे़ दिन हुए
रोया नहीं खुल के
दिल बहुत रोया
किसी से कुछ
कहा नहीं खुल के

किस से कहूं
और क्या
समझ में न आया
रहता हूं कतराया
बडे दिन हुए

कई बार मुस्कुराया भी हूं
बस नकली मुस्कान
झूठ मूठ ही मरे चेहरे पर
लाया हूं जान
बडे़ दिन हुए

अब रो लेना चाहता हूं
पर किस कंधे पर
रोऊं सर रख कर
वो चला गया है दूर
बडे़ दिन हुए


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