गुनाह

गुनाहे कहना हाले दिल आज क्यों कर बैठे,
अपने दिल की आवाज़ों को क्यों बाहर निकलने दे बैठे।

सुनना ही सबको अपनी किस्मत को है हासिल,
आज दिल की बात सुनकर गै़र हुआ जो था शामिल।

बोल ही सबब हैं परेशानीयों का “स्याह” शायद सारी,
आज समझ में आया खु़दा को ख़ामोश इबादत है क्यों प्यारी।

~ by Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष on December 15, 2007.

One Response to “गुनाह”

  1. behad acchi lagi

Leave a Reply